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mahabharat 9.17.52: हे कुरुपुत्र! इन्द्र के ऐरावत हाथी के समान विशाल राजा शल्य, जिनका कवच भीमसेन ने फाड़ डाला था, वज्र से आहत पर्वत शिखर के समान भुजाएँ फैलाकर रथ से पृथ्वी पर गिर पड़े।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.17.52 
प्रसार्य बाहू च रथाद् गतो गां
संछिन्नवर्मा कुरुनन्दनेन।
महेन्द्रवाहप्रतिमो महात्मा
वज्राहतं शृङ्गमिवाचलस्य॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
हे कुरुपुत्र! इन्द्र के ऐरावत हाथी के समान विशाल राजा शल्य, जिनका कवच भीमसेन ने फाड़ डाला था, वज्र से आहत पर्वत शिखर के समान भुजाएँ फैलाकर रथ से पृथ्वी पर गिर पड़े।
 
Son of Kuru! King Shalya, who was as huge as Indra's Airavat elephant, whose armour had been torn to pieces by Bhimasena, fell from his chariot to the ground with his arms outstretched like a mountain peak struck by thunderbolt.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)