Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.17.51: जैसे कार्तिकेय के तेज से आहत होकर महान् क्रौंच पर्वत गेरू मिश्रित झरनों के जल से भीग गया था, उसी प्रकार शल्य का सम्पूर्ण शरीर उसके घावों तथा नाक, आँख, कान और मुँह से बहते हुए रक्त से नहा गया था॥ 51॥ | mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे कार्तिकेय के तेज से आहत होकर महान् क्रौंच पर्वत गेरू मिश्रित झरनों के जल से भीग गया था, उसी प्रकार शल्य का सम्पूर्ण शरीर उसके घावों तथा नाक, आँख, कान और मुँह से बहते हुए रक्त से नहा गया था॥ 51॥
Just as the great mountain Krauncha, struck by Kartikeya's power, was drenched in the water of the ochre-mixed springs, similarly the entire body of Shalya was bathed in the blood oozing from his wounds and nose, eyes, ears and mouth.॥ 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥