Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.17.49: युधिष्ठिर ने उस महाअस्त्र पर प्रहार करने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा दी थी। इसके अतिरिक्त, उसकी शक्ति और प्रभाव को रोक पाना किसी के लिए भी असंभव था। फिर भी, मद्रराज शल्य ने उसका प्रहार सहने के लिए ऐसी गर्जना की, मानो अग्निदेव हवन में अर्पित घी की धारा को ग्रहण करने के लिए प्रज्वलित हो गए हों। 49। | mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
युधिष्ठिर ने उस महाअस्त्र पर प्रहार करने के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा दी थी। इसके अतिरिक्त, उसकी शक्ति और प्रभाव को रोक पाना किसी के लिए भी असंभव था। फिर भी, मद्रराज शल्य ने उसका प्रहार सहने के लिए ऐसी गर्जना की, मानो अग्निदेव हवन में अर्पित घी की धारा को ग्रहण करने के लिए प्रज्वलित हो गए हों। 49।
Yudhishthira had used all his might to attack that great weapon. Apart from this, it was impossible for anyone to stop its power and effect. Even then, Madra king Shalya roared to bear its blow, as if the fire god had lit up to receive the stream of ghee offered in havan. 49.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥