Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.17.48: जैसे रुद्र ने अंधकासुर पर घातक बाण चलाया था, उसी प्रकार धर्मराज युधिष्ठिर ने क्रोध में नृत्य करते हुए अपनी सुंदर भुजाओं वाली बलवान भुजा को फैलाकर उस पर शल्य नामक शक्ति का प्रयोग किया और गर्जना करते हुए कहा, 'हे पापी! तू मारा गया।'   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  9.17.48 
हतोऽसि पापेत्यभिगर्जमानो
रुद्रोऽन्धकायान्तकरं यथेषुम्।
प्रसार्य बाहुं सुदृढं सुपाणिं
क्रोधेन नृत्यन्निव धर्मराज:॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
जैसे रुद्र ने अंधकासुर पर घातक बाण चलाया था, उसी प्रकार धर्मराज युधिष्ठिर ने क्रोध में नृत्य करते हुए अपनी सुंदर भुजाओं वाली बलवान भुजा को फैलाकर उस पर शल्य नामक शक्ति का प्रयोग किया और गर्जना करते हुए कहा, 'हे पापी! तू मारा गया।'
 
Just as Rudra had shot a fatal arrow at Andhakasur, similarly, Dharmaraja Yudhishthira, dancing in anger, stretched out his strong arm with beautiful hands and used that Shakti Shalya on him and roared saying, 'O sinner! You are killed.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)