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mahabharat 9.17.45: त्वष्टा प्रजापति (विश्वकर्मा) - ने भगवान शंकर के लिए इस शक्ति का निर्माण किया था। यह शत्रुओं के प्राणों और शरीरों को भस्म करने में समर्थ थी तथा जल, थल और आकाश आदि में रहने वाले प्राणियों को बलपूर्वक मारने में भी समर्थ थी।॥ 45॥   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.17.45 
ईशानहेतो: प्रतिनिर्मितां तां
त्वष्ट्रा रिपूणामसुदेहभक्ष्याम्।
भूम्यन्तरिक्षादिजलाशयानि
प्रसह्य भूतानि निहन्तुमीशाम्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
त्वष्टा प्रजापति (विश्वकर्मा) - ने भगवान शंकर के लिए इस शक्ति का निर्माण किया था। यह शत्रुओं के प्राणों और शरीरों को भस्म करने में समर्थ थी तथा जल, थल और आकाश आदि में रहने वाले प्राणियों को बलपूर्वक मारने में भी समर्थ थी।॥ 45॥
 
Tvashta Prajapati (Vishwakarma) - had created this power for Lord Shankar. It was capable of devouring the lives and bodies of enemies and was also capable of killing creatures living in water, land and sky etc. by force.॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)