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mahabharat 9.17.43: वह शक्ति का पाश हाथ में धारण किए हुए कालरात्रि के समान भयंकर, यमराज की धाय के समान भयंकर और ब्रह्मदण्ड के समान अमोघ थी। धर्मराज ने युद्ध में उसका प्रयोग बड़ी सावधानी और सतर्कता से किया था ॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  9.17.43 
तां कालरात्रीमिव पाशहस्तां
यमस्य धात्रीमिव चोग्ररूपाम्।
स ब्रह्मदण्डप्रतिमाममोघां
ससर्ज यत्तो युधि धर्मराज:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
वह शक्ति का पाश हाथ में धारण किए हुए कालरात्रि के समान भयंकर, यमराज की धाय के समान भयंकर और ब्रह्मदण्ड के समान अमोघ थी। धर्मराज ने युद्ध में उसका प्रयोग बड़ी सावधानी और सतर्कता से किया था ॥ 43॥
 
Holding the noose of power in her hand, she was as fierce as Kalaratri, as dreadful as the nurse of Yamaraja and as infallible as the Brahmadanda. Dharmaraja used it in the war with great care and caution. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)