Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.17.40: हे मनुष्यों के स्वामी! मुझे यह आश्चर्य की बात लगती है कि पापरहित और शुद्ध हृदय वाले राजा युधिष्ठिर के क्रोध करने पर भी मद्रराज शल्य जलकर भस्म नहीं हुए। | mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे मनुष्यों के स्वामी! मुझे यह आश्चर्य की बात लगती है कि पापरहित और शुद्ध हृदय वाले राजा युधिष्ठिर के क्रोध करने पर भी मद्रराज शल्य जलकर भस्म नहीं हुए।
O Lord of men! It seems to me an astonishing thing that despite the anger of the sinless and pure-hearted King Yudhishthira, the Madra king Shalya did not burn to ashes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥