श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  9.17.39 
स धर्मराजो मणिहेमदण्डां
जग्राह शक्तिं कनकप्रकाशाम्।
नेत्रे च दीप्ते सहसा विवृत्य
मद्राधिपं क्रुद्धमना निरैक्षत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज ने रत्नजड़ित स्वर्णदण्ड तथा स्वर्ण के समान चमकने वाली शक्ति हाथ में ली और क्रोधित होकर मद्रराज शल्य की ओर क्रोध से आँखें फाड़कर देखने लगे।
 
Dharamraj took in his hand the golden rod studded with gems and the Shakti that shone like gold. Enraged, he suddenly looked at Madraraj Shalya with his eyes wide open with rage.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)