Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.17.34: उस भीषण ध्वनि से व्यथित होकर अजेय कौरव सेना दुःखी और अचेत हो गई। रक्त से लथपथ होकर वह अज्ञात दिशाओं में भागने लगी।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  9.17.34 
तेनाथ शब्देन विभीषणेन
तथाभितप्तं बलमप्रधृष्यम्।
कांदिग्भूतं रुधिरेणोक्षिताङ्गं
विसंज्ञकल्पं च तदा विषण्णम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उस भीषण ध्वनि से व्यथित होकर अजेय कौरव सेना दुःखी और अचेत हो गई। रक्त से लथपथ होकर वह अज्ञात दिशाओं में भागने लगी।
 
Aggrieved by that horrific sound, the invincible Kaurava army became sad and unconscious. Soaked in blood, it started running in unknown directions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)