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mahabharat 9.17.33: भीमसेन का यह अद्भुत कार्य देखकर पाण्डव सेना के श्रेष्ठ महारथी अत्यन्त प्रसन्न हुए और हँसते हुए जोर-जोर से गर्जना करने लगे तथा चन्द्रमा के समान तेजस्वी शंख बजाने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  9.17.33 
तत् कर्म भीमस्य समीक्ष्य हृष्टा-
स्ते पाण्डवानां प्रवरा रथौघा:।
नादं च चक्रुर्भृशमुत्स्मयन्त:
शङ्खांश्च दध्मु: शशिसंनिकाशान्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन का यह अद्भुत कार्य देखकर पाण्डव सेना के श्रेष्ठ महारथी अत्यन्त प्रसन्न हुए और हँसते हुए जोर-जोर से गर्जना करने लगे तथा चन्द्रमा के समान तेजस्वी शंख बजाने लगे।
 
On seeing this wonderful deed of Bhimasena, the best charioteers of the Pandava army were very pleased. Laughing, they began to roar loudly and blow the conch which was as bright as the moon.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)