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mahabharat 9.17.31: क्रोध में यमराज की भाँति उछलते हुए आये राजा शल्य को अचानक धृष्टद्युम्न, द्रौपदी के पुत्र शिखण्डी तथा सात्यकि ने घेर लिया। 31॥   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  9.17.31 
तं चापि राजानमथोत्पतन्तं
क्रुद्धं यथैवान्तकमापतन्तम्।
धृष्टद्युम्नो द्रौपदेया: शिखण्डी
शिनेश्च नप्ता सहसा परीयु:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
क्रोध में यमराज की भाँति उछलते हुए आये राजा शल्य को अचानक धृष्टद्युम्न, द्रौपदी के पुत्र शिखण्डी तथा सात्यकि ने घेर लिया। 31॥
 
Dhrishtadyumna, Draupadi's son, Shikhandi and Satyaki suddenly surrounded King Shalya, who came jumping like Yamraj in anger. 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)