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mahabharat 9.17.28: तत्पश्चात् समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ भीमसेन और माद्रीपुत्र सहदेव ने युद्धस्थल में अकेले ही बड़े वेग से विचरण करने वाले शल्य पर सैकड़ों बाणों की वर्षा की।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  9.17.28 
तमग्रणी: सर्वधनुर्धराणा-
मेकं चरन्तं समरेऽतिवेगम्।
भीम: शतेन व्यकिरच्छराणां
माद्रीपुत्र: सहदेवस्तथैव॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् समस्त धनुर्धरों में श्रेष्ठ भीमसेन और माद्रीपुत्र सहदेव ने युद्धस्थल में अकेले ही बड़े वेग से विचरण करने वाले शल्य पर सैकड़ों बाणों की वर्षा की।
 
After this, Bhimasena, the foremost of all archers, and Sahadeva, the son of Madri, showered hundreds of arrows on Shalya, who was moving alone in the battle-field with great speed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)