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mahabharat 9.17.26: जब मद्रराज शल्य ने राजा युधिष्ठिर की ऐसी दशा कर दी थी, तब महाहृदयी भीमसेन ने एक तीव्र बाण से उनका धनुष काट डाला तथा अन्य दो बाणों से उस राजा को भी अत्यन्त घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  9.17.26 
तथा कृते राजनि भीमसेनो
मद्राधिपस्याथ ततो महात्मा।
छित्त्वा धनुर्वेगवता शरेण
द्वाभ्यामविध्यत् सुभृशं नरेन्द्रम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
जब मद्रराज शल्य ने राजा युधिष्ठिर की ऐसी दशा कर दी थी, तब महाहृदयी भीमसेन ने एक तीव्र बाण से उनका धनुष काट डाला तथा अन्य दो बाणों से उस राजा को भी अत्यन्त घायल कर दिया।
 
When Madra king Shalya had put King Yudhishthira in such a condition, then the great-hearted Bhimasena cut his bow with a rapid arrow and also injured that king very badly with two other arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)