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mahabharat 9.17.24: इसके बाद उन्होंने अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी छुरे से राजा युधिष्ठिर के धनुष पर प्रहार किया। फिर कृपाचार्य ने छः बाणों से उनके सारथि को भी मार डाला। सारथि उनके सामने ही भूमि पर गिर पड़ा॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  9.17.24 
ततोऽपरेण ज्वलनार्कतेजसा
क्षुरेण राज्ञो धनुरुन्ममाथ।
कृपश्च तस्यैव जघान सूतं
षड्‍‍भि: शरै: सोऽभिमुख: पपात॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद उन्होंने अग्नि और सूर्य के समान तेजस्वी छुरे से राजा युधिष्ठिर के धनुष पर प्रहार किया। फिर कृपाचार्य ने छः बाणों से उनके सारथि को भी मार डाला। सारथि उनके सामने ही भूमि पर गिर पड़ा॥ 24॥
 
After this, he struck the bow of King Yudhishthira with a razor as bright as the fire and the sun. Then Kripacharya also killed his charioteer with six arrows. The charioteer fell on the ground right in front of him.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)