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mahabharat 9.17.21: तत्पश्चात् मद्रराज ने अपना उत्तम धनुष खींचा और अनेक बाण चलाकर कुरुवंश के अभिमानी राजा युधिष्ठिर का धनुष काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  9.17.21 
ततस्तु मद्राधिपति: प्रकृष्टं
धनुर्विकृष्य व्यसृजत् पृषत्कान्।
द्वाभ्यां शराभ्यां च तथैव राज्ञ-
श्चिच्छेद चापं कुरुपुङ्गवस्य॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मद्रराज ने अपना उत्तम धनुष खींचा और अनेक बाण चलाकर कुरुवंश के अभिमानी राजा युधिष्ठिर का धनुष काट डाला।
 
Thereafter the Madra king drew his excellent bow and shot many arrows. With two arrows he cut the bow of the Kuru clan's pride king Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)