Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 9.17.20: इसके बाद धर्मपुत्र महात्मा युधिष्ठिर ने क्रोधित होकर राजा शल्य की छाती पर शीघ्रता से नौ बाण चलाकर उनके स्वर्ण कवच को छेद दिया। तत्पश्चात् उन्होंने छः बाण और छोड़े।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  9.17.20 
त्वरंस्ततो धर्मसुतो महात्मा
शल्यस्य कोपान्नवभि: पृषत्कै:।
भित्त्वा ह्युरस्तपनीयं च वर्म
जघान षड्‍‍भिस्त्वपरै: पृषत्कै:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद धर्मपुत्र महात्मा युधिष्ठिर ने क्रोधित होकर राजा शल्य की छाती पर शीघ्रता से नौ बाण चलाकर उनके स्वर्ण कवच को छेद दिया। तत्पश्चात् उन्होंने छः बाण और छोड़े।
 
After this, Dharmaputra Mahatma Yudhishthira became angry and quickly shot nine arrows at King Shalya's chest and pierced his golden armour. Then he shot six more arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)