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mahabharat 9.17.18: राजन! कुरुवंश के गौरव महारथी युधिष्ठिर ने अत्यन्त घायल होने पर भी मद्रराज शल्य को अचूक बाण से घायल कर दिया (और मूर्छित कर दिया)। इससे वे अत्यन्त प्रसन्न हुए॥18॥   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  9.17.18 
ततोऽतिविद्धोऽथ युधिष्ठिरोऽपि
सुसम्प्रयुक्तेन शरेण राजन्।
जघान मद्राधिपतिं महात्मा
मुदं च लेभे ऋषभ: कुरूणाम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
राजन! कुरुवंश के गौरव महारथी युधिष्ठिर ने अत्यन्त घायल होने पर भी मद्रराज शल्य को अचूक बाण से घायल कर दिया (और मूर्छित कर दिया)। इससे वे अत्यन्त प्रसन्न हुए॥18॥
 
King! Even after being severely wounded, the great warrior Yudhishthira, the pride of the Kuru clan, wounded (and rendered unconscious) the Madra king Shalya with a well-aimed arrow. This made him very happy.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)