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mahabharat 9.17.10: भीमसेन, नकुल, सहदेव तथा सात्यकि द्वारा सुरक्षित किये गये धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अत्यंत वेगशाली बाणों से मद्रराज शल्य की छाती पर प्रहार किया।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  9.17.10 
संरक्षितो भीमसेनेन राजा
माद्रीसुताभ्यामथ माधवेन।
मद्राधिपं पत्रिभिरुग्रवेगै:
स्तनान्तरे धर्मसुतो निजघ्ने॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन, नकुल, सहदेव तथा सात्यकि द्वारा सुरक्षित किये गये धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर ने अत्यंत वेगशाली बाणों से मद्रराज शल्य की छाती पर प्रहार किया।
 
Protected by Bhimasena, Nakula, Sahadeva and Satyaki, King Yudhishthira, the son of Dharma, attacked Madra king Shalya's chest with highly speedy arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)