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mahabharat 9.17.1: संजय कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात् पराक्रमी मद्रराज शल्य ने दूसरा अत्यन्त शक्तिशाली धनुष हाथ में लिया और युधिष्ठिर को घायल करके सिंह के समान दहाड़ने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 17: भीमसेनद्वारा राजा शल्यके घोड़े और सारथिका तथा युधिष्ठिरद्वारा राजा शल्य और उनके भाईका वध एवं कृतवर्माकी पराजय  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  9.17.1 
संजय उवाच
अथान्यद् धनुरादाय बलवान् वेगवत्तरम्।
युधिष्ठिरं मद्रपतिर्भित्त्वा सिंह इवानदत्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन! तत्पश्चात् पराक्रमी मद्रराज शल्य ने दूसरा अत्यन्त शक्तिशाली धनुष हाथ में लिया और युधिष्ठिर को घायल करके सिंह के समान दहाड़ने लगे।
 
Sanjaya says - O King! Thereafter the powerful Madra king Shalya took another very powerful bow in his hand and after wounding Yudhishthira, he began to roar like a lion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)