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mahabharat 9.16.67-68: युधिष्ठिर ने दो मिनट तक उनका पीछा किया और सिंह की तरह दहाड़ते रहे। उसके बाद मद्रराज शल्य मुस्कुराए और दूसरे रथ पर बैठ गए। उनका चमकीला रथ अच्छी तरह सजाया हुआ था। वह विशाल बादल के समान गूँज रहा था। उसमें सभी आवश्यक उपकरण जैसे मशीनें आदि रखी हुई थीं और वह रथ शत्रुओं के रोंगटे खड़े करने के लिए पर्याप्त था। 67-68.   |   mahabharat अध्याय 9.16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.16.67-68 
मुहूर्तमिव तौ गत्वा नर्दमाने युधिष्ठिरे।
स्मित्वा ततो मद्रपतिरन्यं स्यन्दनमास्थित:॥ ६७॥
विधिवत् कल्पितं शुभ्रं महाम्बुदनिनादिनम्।
सज्जयन्त्रोपकरणं द्विषतां लोमहर्षणम्॥ ६८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने दो मिनट तक उनका पीछा किया और सिंह की तरह दहाड़ते रहे। उसके बाद मद्रराज शल्य मुस्कुराए और दूसरे रथ पर बैठ गए। उनका चमकीला रथ अच्छी तरह सजाया हुआ था। वह विशाल बादल के समान गूँज रहा था। उसमें सभी आवश्यक उपकरण जैसे मशीनें आदि रखी हुई थीं और वह रथ शत्रुओं के रोंगटे खड़े करने के लिए पर्याप्त था। 67-68.
 
Yudhishthira chased them for two minutes and roared like a lion. After that Madra king Shalya smiled and sat on another chariot. His bright chariot was decorated properly. It made a deep sound like a huge cloud. All the necessary equipment like machines etc. were kept in it and that chariot was enough to give goosebumps to the enemies. 67-68.
 
इति श्रीमहाभारते शल्यपर्वणि शल्ययुधिष्ठिरयुद्धे षोडशोऽध्याय:॥ १६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शल्यपर्वमें शल्य और युधिष्ठिरका युद्धविषयक सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)