श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 59-60
 
 
श्लोक  9.16.59-60 
हत्वा मद्राधिपं पार्थो भोक्ष्यतेऽद्य वसुन्धराम्॥ ५९॥
शल्यो वा पाण्डवं हत्वा दद्याद् दुर्योधनाय गाम्।
इतीव निश्चयो नाभूद् योधानां तत्र भारत॥ ६०॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! ‘आज कुन्तीकुमार युधिष्ठिर राजा मद्र को मारकर इस पृथ्वी का राज्य भोगेंगे अथवा पाण्डुकुमार युधिष्ठिर को मारकर पृथ्वी का राज्य दुर्योधन को सौंप देंगे।’ वहाँ उपस्थित योद्धा इस विषय में निश्चय न कर सके ॥59-60॥
 
Bharatnandan! ‘Today, Kuntikumar Yudhishthir will kill King Madra and enjoy the kingdom of this earth or he will kill Pandukumar Yudhishthir and hand over the kingdom of the earth to Duryodhana.’ The warriors there could not decide on this. 59-60॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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