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mahabharat 9.16.50: जिस प्रकार इन्द्र ने अपने शक्तिशाली वज्रों के प्रहार से पर्वतों को नष्ट कर दिया था, उसी प्रकार पाण्डवों में ज्येष्ठ ने जिस भी सेना की ओर अग्रसर होते, उसे अपने बाणों से मार गिराया।   |   mahabharat अध्याय 9.16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  9.16.50 
यां यां प्रत्युद्ययौ सेनां तां तां ज्येष्ठ: स पाण्डव:।
शरैरपातयद् राजन् गिरीन् वज्रैरिवोत्तमै:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार इन्द्र ने अपने शक्तिशाली वज्रों के प्रहार से पर्वतों को नष्ट कर दिया था, उसी प्रकार पाण्डवों में ज्येष्ठ ने जिस भी सेना की ओर अग्रसर होते, उसे अपने बाणों से मार गिराया।
 
Just as Indra had destroyed mountains with the blows of his mighty thunderbolts, so too the eldest of the Pandavas killed with their arrows whichever army they advanced towards.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)