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mahabharat 9.16.48: वहाँ हमने कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर के विषय में एक आश्चर्यजनक बात देखी। यद्यपि वे पहले संयमी और सौम्य स्वभाव के थे, किन्तु बाद में वे कठोर हो गए। 48.   |   mahabharat अध्याय 9.16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  9.16.48 
तत्राश्चर्यमपश्याम कुन्तीपुत्रे युधिष्ठिरे।
पुरा भूत्वा मृदुर्दान्तो यत् तदा दारुणोऽभवत्॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
वहाँ हमने कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर के विषय में एक आश्चर्यजनक बात देखी। यद्यपि वे पहले संयमी और सौम्य स्वभाव के थे, किन्तु बाद में वे कठोर हो गए। 48.
 
There we saw a surprising thing about Yudhishthira, the son of Kunti. Though he was self-controlled and of a gentle nature earlier, he became harsh at that time. 48.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)