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mahabharat 9.16.47: तत्पश्चात् राजा युधिष्ठिर ने अमराष्टक में भरकर, दाँतों के समान श्वेत और मनकों के समान वेगवान घोड़ों को हाँकते हुए मद्रराज शल्य पर आक्रमण किया॥47॥   |   mahabharat अध्याय 9.16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  9.16.47 
युधिष्ठिरस्तु मद्रेशमभ्यधावदमर्षित:।
स्वयं संनोदयन्नश्वान् दन्तवर्णान् मनोजवान्॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा युधिष्ठिर ने अमराष्टक में भरकर, दाँतों के समान श्वेत और मनकों के समान वेगवान घोड़ों को हाँकते हुए मद्रराज शल्य पर आक्रमण किया॥47॥
 
After that, King Yudhishthira, filled with Amarsha and himself driving horses as white as teeth and as fast as beads, attacked Madraraja Shalya. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)