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mahabharat 9.16.33-34: इसी प्रकार कुरुवंश के महारथी युधिष्ठिर ने भी हाथ में सुन्दर धनुष लेकर द्रोणाचार्य द्वारा दी हुई नाना प्रकार की शिक्षाओं का प्रदर्शन करते हुए शीघ्रतापूर्वक सुन्दर एवं विचित्र प्रकार से बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।   |   mahabharat अध्याय 9.16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  9.16.33-34 
तथैव कुरुराजोऽपि प्रगृह्य रुचिरं धनु:॥ ३३॥
द्रोणोपदेशान् विविधान् दर्शयानो महामना:।
ववर्ष शरवर्षाणि चित्रं लघु च सुष्ठु च॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार कुरुवंश के महारथी युधिष्ठिर ने भी हाथ में सुन्दर धनुष लेकर द्रोणाचार्य द्वारा दी हुई नाना प्रकार की शिक्षाओं का प्रदर्शन करते हुए शीघ्रतापूर्वक सुन्दर एवं विचित्र प्रकार से बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी।
 
Similarly, the great king of Kuru, Yudhishthir, taking a beautiful bow in his hand and demonstrating various types of instructions given by Dronacharya, quickly started showering arrows in a beautiful and strange manner.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)