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mahabharat 9.16.30-31h: वे हाथियों की घंटियों की ध्वनि, शंखों की ध्वनि तथा वाद्यों के तेज शोर से पृथ्वी को गुंजायमान कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  9.16.30-31h 
ह्रादेन गजघण्टानां शङ्खानां निनदेन च॥ ३०॥
तूर्यशब्देन महता नादयन्तश्च मेदिनीम्।
 
 
अनुवाद
वे हाथियों की घंटियों की ध्वनि, शंखों की ध्वनि तथा वाद्यों के तेज शोर से पृथ्वी को गुंजायमान कर रहे थे।
 
They were resonating the earth with the sound of the elephants' bells, the sound of the conches and the loud noise of the musical instruments. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)