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mahabharat 9.16.28-29h: उस समय राजा युधिष्ठिर ने पूर्वोक्त प्रतिज्ञा करके मद्रराज शल्य पर आक्रमण कर दिया। तब पांचाल योद्धा शंख, तुरही आदि सैकड़ों प्रकार के युद्ध के वाद्य बजाने लगे और सिंह के समान गर्जना करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 9.16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  9.16.28-29h 
प्रतिज्ञां तां तदा राजा कृत्वा मद्रेशमभ्ययात्।
तत: शङ्खांश्च भेरीश्च शतशश्चैव पुष्कलान्॥ २८॥
अवादयन्त पञ्चाला: सिंहनादांश्च नेदिरे।
 
 
अनुवाद
उस समय राजा युधिष्ठिर ने पूर्वोक्त प्रतिज्ञा करके मद्रराज शल्य पर आक्रमण कर दिया। तब पांचाल योद्धा शंख, तुरही आदि सैकड़ों प्रकार के युद्ध के वाद्य बजाने लगे और सिंह के समान गर्जना करने लगे।
 
At that time, King Yudhishthira made the aforementioned vow and attacked Madra king Shalya. Then the Panchala warriors started playing hundreds of types of instruments of war like conch, trumpets etc. and roaring like lions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)