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mahabharat 9.16.2: यद्यपि युद्ध के लिए उन्मत्त आपके सभी योद्धा पीड़ित थे, तथापि संख्या में अधिक होने के कारण उन सबने आक्रमण करके क्षण भर में ही पाण्डव योद्धाओं को कुचल डाला॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 9.16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  9.16.2 
पीडितास्तावका: सर्वे प्रधावन्तो रणोत्कटा:।
क्षणेन चैव पार्थांस्ते बहुत्वात् समलोडयन्॥ २॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि युद्ध के लिए उन्मत्त आपके सभी योद्धा पीड़ित थे, तथापि संख्या में अधिक होने के कारण उन सबने आक्रमण करके क्षण भर में ही पाण्डव योद्धाओं को कुचल डाला॥ 2॥
 
Although all your warriors, who were mad for the war, were suffering, yet being greater in number, they all attacked and crushed the Pandava warriors in a moment.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)