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mahabharat 9.16.19-20h: इस विषय में मेरे मन में जो संकल्प है, वह मैं तुमसे कह रहा हूँ, सुनो। माद्री के दोनों वीर पुत्र नकुल और सहदेव, जो युद्धस्थल में इंद्र के लिए भी अजेय हैं और वीर योद्धाओं द्वारा सम्मानित हैं, वे मेरे रथ के पहियों की रक्षा करें।   |   mahabharat अध्याय 9.16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 16: पाण्डव-सैनिकों और कौरव-सैनिकोंका द्वन्द्वयुद्ध, भीमसेनद्वारा दुर्योधनकी तथा युधिष्ठिरद्वारा शल्यकी पराजय  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  9.16.19-20h 
तत्र यन्मानसं मह्यं तत् सर्वं निगदामि व:।
चक्ररक्षाविमौ वीरौ मम माद्रवतीसुतौ॥ १९॥
अजेयौ वासवेनापि समरे शूरसम्मतौ।
 
 
अनुवाद
इस विषय में मेरे मन में जो संकल्प है, वह मैं तुमसे कह रहा हूँ, सुनो। माद्री के दोनों वीर पुत्र नकुल और सहदेव, जो युद्धस्थल में इंद्र के लिए भी अजेय हैं और वीर योद्धाओं द्वारा सम्मानित हैं, वे मेरे रथ के पहियों की रक्षा करें।
 
I am telling you all the resolve that I have in mind regarding this, listen. Both the brave sons of Madri, Nakula and Sahadeva, who are invincible even for Indra in the battlefield and respected by the brave warriors, should protect the wheels of my chariot. 19 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)