श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 15: दुर्योधन और धृष्टद्युम्नका एवं अर्जुन और अश्वत्थामाका तथा शल्यके साथ नकुल और सात्यकि आदिका घोर संग्राम  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  9.15.6 
स तै: परिवृत: शूर: सर्वतोऽतिरथैर्भृशम्।
व्यचरत् समरे राजन् दर्शयन्नस्त्रलाघवम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजन! उन महारथियों से चारों ओर से घिरे हुए धृष्टद्युम्न युद्धभूमि में अपनी अस्त्र-शस्त्र चलाने की कला का प्रदर्शन करते हुए इधर-उधर घूमने लगे।
 
King! Surrounded on all sides by those great warriors, Dhrishtadyumna began to roam about on the battlefield, displaying his agility in handling weapons.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)