श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 15: दुर्योधन और धृष्टद्युम्नका एवं अर्जुन और अश्वत्थामाका तथा शल्यके साथ नकुल और सात्यकि आदिका घोर संग्राम  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  9.15.42 
मद्रराजभुजोत्सृष्टै: कङ्कबर्हिणवाजितै:।
सम्पतद्भि: शरैर्घोरैरवाकीर्यत मेदिनी॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
वहाँ की सम्पूर्ण पृथ्वी मद्रराज की भुजाओं से गिरते हुए शंख और मोरपंखयुक्त भयंकर बाणों से आच्छादित हो गई थी ॥ 42॥
 
The entire earth there was covered with dreadful arrows fitted with conches and peacock feathers falling from the arms of the Madra king. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)