श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 15: दुर्योधन और धृष्टद्युम्नका एवं अर्जुन और अश्वत्थामाका तथा शल्यके साथ नकुल और सात्यकि आदिका घोर संग्राम  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  9.15.37 
तेषामासीन्महाराज व्यतिक्षेप: परस्परम्।
सिंहानामामिषेप्सूनां कूजतामिव संयुगे॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! जैसे सिंह मांस के लोभ से आपस में दहाड़ते हुए लड़ते हैं, उसी प्रकार उस रणभूमि में वे सब योद्धा एक-दूसरे पर भयंकर आक्रमण कर रहे थे॥37॥
 
Maharaj! Just as lions fight among themselves roaring in greed for meat, similarly on that battlefield all those warriors were attacking each other fiercely. ॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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