श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 15: दुर्योधन और धृष्टद्युम्नका एवं अर्जुन और अश्वत्थामाका तथा शल्यके साथ नकुल और सात्यकि आदिका घोर संग्राम  »  श्लोक 31-32
 
 
श्लोक  9.15.31-32 
स संनिपातस्तुमुलो बभूवाद्भुतदर्शन:॥ ३१॥
सात्यकेश्चैव शूरस्य मद्राणामधिपस्य च।
यादृशो वै पुरा वृत्त: शम्बरामरराजयो:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
वीर सात्यकि और मद्रराज शल्य का वह युद्ध अत्यन्त भयंकर और अद्भुत प्रतीत हो रहा था, जैसा पूर्वकाल में शम्बरासुर और देवराज इन्द्र के बीच हुआ था।
 
That battle between the valiant Satyaki and the Madra king Shalya appeared to be very fierce and amazing. It was similar to the battle that had taken place in the past between Shambarasur and the king of gods Indra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)