श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 15: दुर्योधन और धृष्टद्युम्नका एवं अर्जुन और अश्वत्थामाका तथा शल्यके साथ नकुल और सात्यकि आदिका घोर संग्राम  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  9.15.25 
अथास्य सशरं चापं मुष्टौ चिच्छेद मारिष।
हयांश्च चतुर: संख्ये प्रेषयामास मृत्यवे॥ २५॥
 
 
अनुवाद
माननीय महोदय! इसके बाद शल्य ने मुष्टि से बाण सहित उसका धनुष काट डाला तथा युद्ध में उसके चारों घोड़ों को भी मार डाला।
 
Honorable Sir! After this Shalya cut off his bow along with the arrow from the fist and also killed all his four horses in the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)