श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 15: दुर्योधन और धृष्टद्युम्नका एवं अर्जुन और अश्वत्थामाका तथा शल्यके साथ नकुल और सात्यकि आदिका घोर संग्राम  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  9.15.24 
मद्रराजस्तत: क्रुद्ध: सात्यकिं नवभि: शरै:।
विव्याध भूय: सप्तत्या शराणां नतपर्वणाम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तब क्रोधित मद्रराज शल्य ने सात्यकि को नौ मुड़े हुए बाणों से घायल कर दिया और फिर सत्तर बाणों से उसे क्षत-विक्षत कर दिया।
 
Then the enraged Madra king Shalya wounded Satyaki with nine arrows having bent ends and then mutilated him with seventy more arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)