श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 15: दुर्योधन और धृष्टद्युम्नका एवं अर्जुन और अश्वत्थामाका तथा शल्यके साथ नकुल और सात्यकि आदिका घोर संग्राम  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  9.15.23 
भीमसेनस्तु तं षष्टॺा सात्यकिर्दशभि: शरै:।
मद्रराजमभिद्रुत्य जघ्नतु: कङ्कपत्रिभि:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
तब भीमसेन ने साठ बाणों से और सात्यकि ने कंकपात्रों से सुसज्जित होकर दस बाणों से मद्रराज पर आक्रमण किया।
 
Then Bhimasena attacked the Madra king with sixty arrows and Satyaki with ten arrows equipped with Kankapatra. 23.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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