श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 15: दुर्योधन और धृष्टद्युम्नका एवं अर्जुन और अश्वत्थामाका तथा शल्यके साथ नकुल और सात्यकि आदिका घोर संग्राम  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  9.15.2 
तयोरासन् महाराज शरधारा: सहस्रश:।
अम्बुदानां यथा काले जलधारा: समन्तत:॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे राजाओं के राजा! जैसे वर्षा ऋतु में बादलों से जल की धाराएँ सर्वत्र फूट पड़ती हैं, उसी प्रकार उन दोनों से बाणों की हजारों धाराएँ गिर रही थीं॥2॥
 
O King of kings! Just as during the rainy season, streams of water pour from the clouds everywhere, in the same way thousands of streams of arrows were falling from both of them.॥ 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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