श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 15: दुर्योधन और धृष्टद्युम्नका एवं अर्जुन और अश्वत्थामाका तथा शल्यके साथ नकुल और सात्यकि आदिका घोर संग्राम  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  9.15.13 
संछाद्य समरे शल्यं नकुल: परवीरहा।
विव्याध चैनं दशभि: स्मयमान: स्तनान्तरे॥ १३॥
 
 
अनुवाद
शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले नकुल ने मुस्कुराते हुए युद्धस्थल में शल्य को बाणों की वर्षा से ढक दिया और उसकी छाती में दस बाण मारे।
 
Smiling, Nakula, that slayer of enemy warriors, covered Shalya with a shower of arrows in the battlefield and shot ten arrows into his chest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)