श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 15: दुर्योधन और धृष्टद्युम्नका एवं अर्जुन और अश्वत्थामाका तथा शल्यके साथ नकुल और सात्यकि आदिका घोर संग्राम  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  9.15.11 
शल्यसायकनुन्नानां पाण्डवानां महामृधे।
त्रातारं नाभ्यगच्छन्त केचित्तत्र महारथा:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब शल्य अपने बाणों से पाण्डव योद्धाओं को पीड़ित कर रहे थे, उस समय उस महायुद्ध में उन्हें कोई रक्षक नहीं मिला ॥11॥
 
When Shalya was hurting the Pandava warriors with his arrows, at that time in that great war he could not find any protector. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)