श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 15: दुर्योधन और धृष्टद्युम्नका एवं अर्जुन और अश्वत्थामाका तथा शल्यके साथ नकुल और सात्यकि आदिका घोर संग्राम  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  9.15.1 
संजय उवाच
दुर्योधनो महाराज धृष्टद्युम्नश्च पार्षत:।
चक्रतु: सुमहद् युद्धं शरशक्तिसमाकुलम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय कहते हैं - महाराज! एक ओर दुर्योधन और द्रुपदपुत्र धृष्टद्युम्न के बीच घोर युद्ध हो रहा था। वह युद्ध बाणों और शस्त्रों के प्रहार से घिरा हुआ था।
 
Sanjaya says- Maharaj! On one side Duryodhan and Drupada's son Dhrishtadyumna were fighting a great battle. That battle was engulfed with the attack of arrows and weapons.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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