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mahabharat 9.14.44: उस वीर के मारे जाने पर रथियों में श्रेष्ठ और परम प्रतापी द्रोणपुत्र अश्वत्थामा तुरन्त उसी रथ पर आरूढ़ हुआ ॥44॥   |   mahabharat अध्याय 9.14: अर्जुन और अश्वत्थामाका युद्ध तथा पांचाल वीर सुरथका वध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 14: अर्जुन और अश्वत्थामाका युद्ध तथा पांचाल वीर सुरथका वध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  9.14.44 
तस्मिन् विनिहते वीरे द्रोणपुत्र: प्रतापवान्।
आरुरोह रथं तूर्णं तमेव रथिनां वर:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
उस वीर के मारे जाने पर रथियों में श्रेष्ठ और परम प्रतापी द्रोणपुत्र अश्वत्थामा तुरन्त उसी रथ पर आरूढ़ हुआ ॥44॥
 
After that hero was killed, Drona's son Ashwatthama, the best among charioteers and the most glorious of all, immediately mounted the same chariot. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)