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mahabharat 9.14.38-39h: सुरथ ने अपना सब प्रकार का भार वहन करने में समर्थ, उत्तम और सुदृढ़ धनुष खींचकर अग्नि और विषैले सर्पों के समान भयंकर बाणों की वर्षा से अश्वत्थामा को आच्छादित कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.14: अर्जुन और अश्वत्थामाका युद्ध तथा पांचाल वीर सुरथका वध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 14: अर्जुन और अश्वत्थामाका युद्ध तथा पांचाल वीर सुरथका वध  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  9.14.38-39h 
विकर्षन् वै धनु: श्रेष्ठं सर्वभारसहं दृढम्॥ ३८॥
ज्वलनाशीविषनिभै: शरैश्चैनमवाकिरत्।
 
 
अनुवाद
सुरथ ने अपना सब प्रकार का भार वहन करने में समर्थ, उत्तम और सुदृढ़ धनुष खींचकर अग्नि और विषैले सर्पों के समान भयंकर बाणों की वर्षा से अश्वत्थामा को आच्छादित कर दिया।
 
Drawing his strong and excellent bow, capable of bearing all kinds of loads, Suratha covered Ashvatthama with a shower of fierce arrows, like fire and poisonous serpents. 38 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)