Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.14.3-4h: महाराज! भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात अर्जुन ने पुनः अपने बाणों की वर्षा से उन सबको ढक दिया। अर्जुन के तीखे बाणों से आहत होकर आपके सैनिक उन बाणों से घायल होकर भी अर्जुन को छोड़ न सके। 3 1/2॥ | mahabharat अध्याय 9.14: अर्जुन और अश्वत्थामाका युद्ध तथा पांचाल वीर सुरथका वध । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भूयश्चैव महाराज शरवर्षैरवाकिरत्।
शरकण्टकितास्ते तु तावका भरतर्षभ॥ ३॥
न जहु: पार्थमासाद्य ताडॺमाना: शितै: शरै:।
अनुवाद
महाराज! भरतश्रेष्ठ! तत्पश्चात अर्जुन ने पुनः अपने बाणों की वर्षा से उन सबको ढक दिया। अर्जुन के तीखे बाणों से आहत होकर आपके सैनिक उन बाणों से घायल होकर भी अर्जुन को छोड़ न सके। 3 1/2॥
Maharaj! Bharatshrestha! After that Arjun again covered them all with the shower of his arrows. After being hit by Arjuna's sharp arrows, your soldiers could not leave Arjuna, even after being pricked by those arrows. 3 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥