Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 9.13.7-8: माननीय राजा! युद्धस्थल में उन महारथियों द्वारा पीड़ित होने पर भी, विजय प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्पित, वीर शल्य ने भारी भार वहन करने में समर्थ तथा शत्रुओं के वेग को नष्ट करने में समर्थ एक भयंकर धनुष खींचा और सात्यकि पर पच्चीस, भीमसेन पर सत्तर तथा नकुल पर सात बाण छोड़े। | mahabharat अध्याय 9.13: मद्रराज शल्यका अद्भुत पराक्रम । mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
माननीय राजा! युद्धस्थल में उन महारथियों द्वारा पीड़ित होने पर भी, विजय प्राप्ति के लिए दृढ़ संकल्पित, वीर शल्य ने भारी भार वहन करने में समर्थ तथा शत्रुओं के वेग को नष्ट करने में समर्थ एक भयंकर धनुष खींचा और सात्यकि पर पच्चीस, भीमसेन पर सत्तर तथा नकुल पर सात बाण छोड़े।
Honorable King! In the battle-field, the valiant Shalya, despite being tormented by those mighty car-warriors, being determined to achieve victory, drew a dreadful bow, capable of bearing heavy loads and capable of destroying the enemy's speed, and shot twenty-five arrows at Satyaki, seventy at Bhimasena, and seven at Nakul.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥