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mahabharat 9.13.45-46h: महाबली मद्रराज के द्वारा छोड़े गए बाणों की तीव्र वर्षा से पाण्डवों की सेना विचलित होती हुई देखकर देवता, गन्धर्व और दानव बहुत आश्चर्यचकित हुए ॥45 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 9.13: मद्रराज शल्यका अद्भुत पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 13: मद्रराज शल्यका अद्भुत पराक्रम  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  9.13.45-46h 
मद्रराजेन बलिना लाघवाच्छरवृष्टिभि:।
चाल्यमानं तु तं दृष्ट्वा पाण्डवानां बलार्णवम्॥ ४५॥
विस्मयं परमं जग्मुर्देवगन्धर्वदानवा:।
 
 
अनुवाद
महाबली मद्रराज के द्वारा छोड़े गए बाणों की तीव्र वर्षा से पाण्डवों की सेना विचलित होती हुई देखकर देवता, गन्धर्व और दानव बहुत आश्चर्यचकित हुए ॥45 1/2॥
 
The gods, Gandharvas and demons were greatly astonished to see the army of the Pandavas getting disoriented by the rapid shower of arrows shot by the mighty Madra king. 45 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)