श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 13: मद्रराज शल्यका अद्भुत पराक्रम  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  9.13.37 
समावृतांस्ततस्तांस्तु राजन् वीक्ष्य स्वसैनिकान्।
चिन्तयामास समरे धर्मपुत्रो युधिष्ठिर:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! युद्धस्थल में अपने समस्त सैनिकों को बाणों से आच्छादित देखकर धर्मपुत्र युधिष्ठिर मन में इस प्रकार चिंता करने लगे-॥37॥
 
King! Seeing all his soldiers covered with arrows in the battle-field, Dharmaputra Yudhishthira began to worry in his mind like this -॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)