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mahabharat 9.13.11-12h: इसके अतिरिक्त, अत्यन्त क्रोधित होकर उसने अपने सारथि को एक मुड़े हुए सिरे वाले बाण से घायल कर दिया तथा उसे पुनः तीन बाणों से घायल कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 9.13: मद्रराज शल्यका अद्भुत पराक्रम   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 13: मद्रराज शल्यका अद्भुत पराक्रम  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  9.13.11-12h 
सारथिं चास्य समरे शरेणानतपर्वणा॥ ११॥
विव्याध भृशसंक्रुद्धस्तं वै भूयस्त्रिभि: शरै:।
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त, अत्यन्त क्रोधित होकर उसने अपने सारथि को एक मुड़े हुए सिरे वाले बाण से घायल कर दिया तथा उसे पुनः तीन बाणों से घायल कर दिया।
 
Also, being very angry, he struck his charioteer with an arrow having a bent tip and wounded him again with three arrows. 11 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)