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mahabharat 9.12.61-62h: महाराज! तत्पश्चात् हमने पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर की छाती पर बाणों का जाल फैला हुआ देखा, मानो आकाश में बादलों का बादल उमड़ पड़ा हो।   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 61-62h
 
 
श्लोक  9.12.61-62h 
ततो बाणमयं जालं विततं पाण्डवोरसि॥ ६१॥
अपश्याम महाराज मेघजालमिवोद्‍गतम्।
 
 
अनुवाद
महाराज! तत्पश्चात् हमने पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर की छाती पर बाणों का जाल फैला हुआ देखा, मानो आकाश में बादलों का बादल उमड़ पड़ा हो।
 
Maharaj! Thereafter we saw a net of arrows spread on the chest of Yudhishthira, son of Pandu, as if a cloud of clouds had gathered in the sky. 61 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)