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mahabharat 9.12.59-60h: क्षत्रियों में श्रेष्ठ शल्य, जो अत्यन्त आत्मविश्वास से युक्त थे, क्षत्रियों पर वर्षा करने वाले मेघ के समान बाणों की वर्षा कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 59-60h
 
 
श्लोक  9.12.59-60h 
शल्य: सायकवर्षेण पर्जन्य इव वृष्टिमान्॥ ५९॥
अभ्यवर्षदमेयात्मा क्षत्रियान् क्षत्रियर्षभ:।
 
 
अनुवाद
क्षत्रियों में श्रेष्ठ शल्य, जो अत्यन्त आत्मविश्वास से युक्त थे, क्षत्रियों पर वर्षा करने वाले मेघ के समान बाणों की वर्षा कर रहे थे।
 
Shalya, the greatest of the Kshatriyas, endowed with immense self-confidence, was showering arrows on the Kshatriyas like a rain-bearing cloud. 59 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)