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mahabharat 9.12.57-58h: हमने उस ध्वज को महात्मा पाण्डु के पुत्र द्वारा काटे जाने पर गिरते देखा, जैसे कोई पर्वत शिखर वज्र से गिरकर गिर जाता है।   |   mahabharat अध्याय 9.12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध   ।   mahabharat पर्व 9: शल्य पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 9: शल्य पर्व  »  अध्याय 12: भीमसेन और शल्यका भयानक गदायुद्ध तथा युधिष्ठिरके साथ शल्यका युद्ध, दुर्योधनद्वारा चेकितानका और युधिष्ठिरद्वारा चन्द्रसेन एवं द्रुमसेनका वध, पुन: युधिष्ठिर और माद्रीपुत्रोंके साथ शल्यका युद्ध  »  श्लोक 57-58h
 
 
श्लोक  9.12.57-58h 
पाण्डुपुत्रेण वै तस्य केतुं छिन्नं महात्मना॥ ५७॥
निपतन्तमपश्याम गिरिशृङ्गमिवाहतम्।
 
 
अनुवाद
हमने उस ध्वज को महात्मा पाण्डु के पुत्र द्वारा काटे जाने पर गिरते देखा, जैसे कोई पर्वत शिखर वज्र से गिरकर गिर जाता है।
 
We saw that flag falling after being cut by the son of Mahatma Pandu, like a mountain peak falling down after being struck by a thunderbolt. 57 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)